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भूतिया गाँव का रहस्य

भूतिया गाँव एक छोटे से गाँव में एक विचित्र रहस्यमय भूतिया जगह थी। गाँव के लोग उस जगह से भयभीत थे और वहाँ जाने से बचते थे। कहानी के मुख्य पात्र राज नामक एक विद्यार्थी था जो इस भूतिया गाँव के बारे में सभी कहानियों को चुनौती देने का फैसला करता है। एक दिन, राज और उसके दो दोस्त नेहा और विक्रम गाँव के पास होते हैं और भूतिया जगह को देखने का प्लान बनाते हैं। रात को जब चाँदनी और सितारे स्वर्गीय आकृति देते हैं, तो तीसरों दोस्त भूतिया जगह की तरफ निकलते हैं। गाँव के पास पहुँचने पर, उन्हें वहाँ खाली सड़कें, अंधेरे क़िले, और डरावनी खिड़कियाँ दिखती हैं। धीरे-धीरे भयभीत होते हुए वे एक पुराने हaveli पर पहुंचते हैं। वहाँ भूतिया वातावरण उन्हें अपनी ओर खींच रहा था। राज विक्रम को कहता है, "क्या हमें वहाँ चलना चाहिए? इसमें कोई भी खतरा हो सकता है।" विक्रम ने धैर्य से जवाब दिया, "हां राज, हम तो सिर्फ कहानियों में सुना है। असलियत में तो भूत-प्रेत नहीं होते। हम वहाँ जाकर सच्चाई को खोजेंगे।" नेहा भयभीत होकर चिल्लाती है, "नहीं, मैं वहाँ नहीं जाउंगी। यह भूतों का घर है।" राज और वि...

धन से असली सुख

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एक बार एक गांव में एक बड़े साहूकार का एक सुन्दर बेटा था। उसके पास समृद्धि और धन-दौलत की कमी नहीं थी, लेकिन उसमें अहंकार और दूसरों को ताक़त से देखने की आदत थी। उसे अपने आप में एक शक्तिशाली और महान व्यक्ति मानने की चाह थी। एक दिन, उसके गांव में एक पुराने साधु बाबा का आगमन हुआ। उस साधु बाबा की दृष्टि अजीब तरीके से उस बड़े साहूकार को प्रभावित कर गई। बाबा ने अपने आंखों में स्नेह भरी हसी है और बोले, "बेटा, तुम तो धनवान हो, लेकिन क्या तुम सच्चे सुखी हो? धन के बिना असली सुख कहाँ मिलता है।" बड़े साहूकार ने अपनी आदतों में कुछ नहीं बदला, लेकिन उस साधु बाबा के साथ उसकी बातचीत में समय बिताना शुरू किया। बाबा के संदेशों का असर होने लगा और धीरे-धीरे उसका अहंकार टूटने लगा। वह समझ गया कि असली सुख समझदारी, समर्पण, और दूसरों की मदद करने में है। वह धन का उपयोग भी समझदारी से करने लगा और गांव के लोगों के लिए विभिन्न समाज सेवा परियोजनाओं में निवेश करने लगा। इस तरह, बड़े साहूकार ने न केवल अपने आप को सच्चे सुखी बनाया, बल्कि उसने अपने गांव को भी समृद्ध, समाजवादी और सहानुभूति से भर दिया। सच्चे सुख...