भूतिया मकान की कहानी।

एक छोटे से गांव में एक पुराने भूतिया मकान की कहानी है। यह मकान विचित्र और डरावना होने के कारण उस गांव के लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया था। कहते थे कि जिस व्यक्ति ने इस मकान में रात बिताई है, वह अगले दिन सुबह तक नहीं रह पाया। इस खबर से डरकर लोग इस मकान से दूर रहने लगे और उसे 'भूतिया मकान' के नाम से जानने लगे।
एक दिन, गांव के एक बहादुर और साहसी लड़के नाम था विक्रांत। वह भूतिया मकान के बारे में कई किस्से सुना चुका था, लेकिन उसे भूतों से डर नहीं था। उसे उत्साह था कि वह इस मकान के असलीता को पता करें। विक्रांत ने अपने एक दोस्त से मदद ली और रात के समय उन्होंने भूतिया मकान की यात्रा शुरू की। वे दोनों लड़के अत्यंत सावधानी बरतते हुए मकान के अंदर चले गए। अंदर घुसते ही उन्हें विचित्र आवाज़ें सुनाई देने लगीं। वे अपने दिल को बहाल करते हुए आगे बढ़ते गए। धीरे-धीरे वे एक वर्तमान बना मकान में पहुंचे, जहां एक ज़िन्दगी से जुड़े व्यक्ति का चित्र लटका हुआ था। उन्होंने उस चित्र की विस्तृत जानकारी निचे दी गई थी। चित्र के निचे लिखा था: "सावधान! यहां पर उठाए गए किसी भी वस्तु को वापस न रखें।" विक्रांत और उसके दोस्त ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया और आगे बढ़ते हुए एक छोटे कमरे में पहुंचे, जिसका दरवाज़ा बंद था। उन्होंने दरवाज़ा खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं खुला। कमरे के बाहर लिखा था: "इस कमरे में रात बिताने की कोशिश न करें, अन्दर एक भूत रहता है।" विक्रांत और उसके दोस्त ने एक-दूसरे को देखकर मुस्कराया, क्योंकि उन्हें भूतों से डर नहीं था। वे एक और कमरे की ओर बढ़ते हुए चले गए, जिसका दरवाज़ा खुला हुआ था। कमरे के अंदर उन्हें एक अत्यंत सुंदर संगीतमय परिदृश्य दिखाई दिया। वे दोनों दिवाने हो गए और उस सुंदरता को देखते रहे।

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