यह कहानी है Ek Darawni Raat की। किसी गांव में, बंटी नाम का एक लड़का रहता था। वह परीक्षा देने के लिए गुजरात जा रहा था। ठंडी का दिन था। चारों तरफ से कोहरा छाया हुआ था। आमने-सामने भी कोई नहीं दिख रहा था। पुरे पंद्रह घंटे के बाद वह गुजरात पहुंच गया था।
Ek Darawni Raat परीक्षा अगले दिन थी। इसलिए वह एक हॉटेल में रहने के लिए सोचा। रात हो गई थी और कही भी उसे। उसके बजट में सस्ता हॉटेल मिल नहीं रहा था। काफ़ी ढूंढ़ने के बाद उसे एक सस्ता हॉटेल मिला। वह उस हॉटेल में एक कमरा बुक करवाया। और जब वह कमरे में गया तो देखा की कमरे के चारों तरफ जाले लगे हुए थे। ऐसा लग रहा था की यह कमरा काफ़ी सालों से बंद पड़ा था। और कमरे के अंदर का माहौल एकदम डरावना और सुनसान लग रहा था। डर कर मारे पसीने निकले लगे। फिर वह आदमी बताने लगा की इस हॉटेल में बहुत साल पहले एक लड़की के साथ चार-पांच लड़के, उसका भयानक तरीके से रेप करके मार दिये थे। लड़की तो मर गई लेकिन किसी को भी नहीं छोडी, और जो भी रात के समय में इस रास्ते से गुजरता हैं सबको अपने कब्जे में कर लेती हैं और मार देती हैं। और कुछ दिन बाद इस हॉटेल पर पुलिस का छापा पड़ा तब से ये हॉटेल बंद है। बंटी जब उस आदमी की पूरी बातें सुना तो वह बहुत जोर जोर से रोने लगा। ये सोच कर की आज मैं मर जाता। फिर वो आदमी बंटी को चुप कराया और बोला चलो, आज रात तुम मेरे घर रह लो, मेरा घर पास में ही हैं। डरो मत अब मैं आ गया हूँ न। बंटी उस आदमी को धन्यवाद किया और उसके साथ उसके घर चला गया। और अपने आप से एक वादा किया की आज के बाद वह भूल कर भी कभी अनजान जगह पर नहीं जाऊंगा

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